नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल ने अप्रत्यक्ष करों की दरों में ऐतिहासिक सुधार करते हुए चार की जगह अब सिर्फ दो जीएसटी स्लैब को मंजूरी दे दी। काउंसिल में सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों ने आम सहमति से जीएसटी की सिर्फ दो दरों, 5 और 18 फीसदी को मंजूरी दी। पनीर, छेना, टेट्रापैक दूध, रोटी, चपाती पराठा, खाखरा जैसी आम लोगों से जुड़ी खाद्य वस्तुओं, दुर्लभ बीमारियों और कैंसर की दवाओं पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा और जीवन बीमा पॉलिसियों को भी करों से राहत दे दी गई है। इसकी लंबे अरसे से मांग उठ रही थी। वहीं, धनाढ्य वर्ग के उपभोग में आने वाली लग्जरी कारों समेत शराब, तंबाकू जैसी चुनिंदा विलासित एवं जीवन के लिए हानिकारक वस्तुओं पर 40 फीसदी का विशेष कर स्लैब बनाया गया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि नई दरें 22 सितंबर से लागू होगी। इस फैसले से 175 से अधिक वस्तुएं सस्ती हो जाएंगी। वर्तमान में जीएसटी की चार दरें 5) 12, 18 और 28 फीसदी लागू हैं। काउंसिल की बुधवार को हुई करीब साढ़े दस घंटे की बैठक के बाद सीतारमण ने बताया कि ये सुधार आम आदमी को ध्यान में रखकर किए गए हैं। आम आदमी के दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर लगने वाले हर कर की कड़ी समीक्षा की और ज्यादातर मामलों में दरों में भारी कमी हुई है। किसानों और कृषि क्षेत्र के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र को भी इससे लाभ होगा। दरों का यह सरलीकरण अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार पहल का हिस्सा है।
बैठक के बाद पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने बताया कि इस फैसले से जीएसटी राजस्व में सालाना 48,000 करोड़ रुपये की कमी आएगी। उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि अवगुण वाली वस्तुओं जैसे शराब, तंबाकू आदि पर 40 फीसदी से ऊपर भी लेवी लगाए जाने का फैसला बाद में होगा।
परिषद ने कारोबारियों पर अनुपालन का बोझ कम करने के उपायों को भी मंजूरी दे दी। स्वीकृत उपायों में मध्यम, लघु और सूक्ष्म उद्यम (एमएसएमई) और स्टार्टअप्स के लिए पंजीकरण का समय 30 दिनों से घटाकर केवल तीन दिन करना शामिल है। निर्यातकों के लिए स्वचालित जीएसटी रिफंड के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। रेडीमेड कपड़े और चमड़ा उत्पादों को लेकर एक सुधार पर फैसला लिया गया है। इसके तहत अब 2,500 रुपये तक के वस्त्र और चमड़ा उत्पादों पर 5 फीसदी जीएसटी लगेगा। पहले यह सीमा सिर्फ 1,000 रुपये थी। 2,500 रुपये से अधिक के उत्पादों पर जीएसटी की दर 12 फीसदी के बदले अब 18 फीसदी होगी।विश्लेषक मानते हैं कि जिन लोगों ने जीएसटी सुधार के कारण खरीदी टाल दी थी, वे अब इस महीने के अंत से दिवाली तक जमकर खरीदी करेंगे। इसमें ज्यादातर दोपहिया वाहन, चार पहिया वाहन, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और एफएमसीजी के खास उत्पाद हो सकते हैं। अक्तूबर व नवंबर में इनकी बिक्री से दिसंबर में भी जीएसटी संग्रह मजबूत रहेगा। अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी और तीसरी तिमाही के जब जीडीपी के आंकड़े आएंगे, तो इनका योगदान दिखेगा। एफएमसीजी कंपनियों ने भी तैयारी शुरू कर दी है। 22 सितंबर के बाद जो भी उत्पाद बाजार में आएंगे, वे सस्ते मिलेंगे।
