मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रो-एक्टिव गवर्नेस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (प्रगति) मॉडल यूपी में विकास से लिहाज से गेम चेंजर साबित हुआ है। इससे ही यूपी आज देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन के रूप में उभरा है। यह बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का मंच होने के साथ नए भारत की नई कार्यसंस्कृति का सशक्त उदाहरण है।
सीएम ने मंगलवार को अपने आवास पर पत्रकारों को सरकार के कामकाज पर प्रगति मॉडल के प्रभाव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस मॉडल की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए रखी थी और 2014 के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया।
प्रगति केवल एक रिव्यू मैकेनिज्म नहीं, बल्कि गवर्नेस रिफॉर्म है। इसने शासन को फाइल केंद्रित संस्कृति से फील्ड आधारित परिणामों की दिशा में अग्रसर किया है। इसके माध्यम से निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है, समय और लागत की बर्बादी रुकी है। केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय के साथ-साथ स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित हुई है।
विभागीय जटिलताओं का समाधान हुआ आसान : मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति ने यह सिद्ध किया है कि जब इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी एक साथ आती हैं, तो आउटकम अपने आप सुनिश्चित हो जाते हैं। डिजिटल गवर्नेस और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को मजबूती देते हुए प्रगति एक ऐसा प्लेटफॉर्म बना है, जहां अंतर-मंत्रालयीय और अंतर-विभागीय समन्वय से जटिल समस्याओं का समाधान करना आसान हुआ है।
