नई दिल्ली। बदलाव के दौर से गुजर रही भारतीय टेस्ट टीम और नए कप्तान शुभमन गिल के लिए पांच टेस्ट की सीरीज का इंग्लैंड दौरा बेहद अहम रहने वाला है। यह दौरा टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया और गिल के लिए दिशा तय करने वाला होगा। नए कप्तान के लिए इंग्लैंड दौरा किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है, लेकिन गिल के समक्ष ऐसे तीन उदाहरण मौजूद हैं, जो उनके लिए प्रेरणा का विषय बन सकते हैं।
भारत और इंग्लैंड के 93 वर्षों के टेस्ट इतिहास में केवल तीन मौके ही ऐसे आए हैं, जब भारतीय टीम इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज जीतने में सफल रही है। इंग्लैंड में ये तीनों जीत उन कप्तानों की अगुवाई में मिली, जिनका यह बतौर कप्तान इंग्लैंड का पहला टेस्ट दौरा था। जी हां, अजित वाडेकर ने 1971, कपिल देव ने 1986 और राहुल द्रविड़ ने 2007 में जब भारत को इंग्लैंड में जीत दिलाई तो वह इंग्लैंड में खेली गई टेस्ट सीरीज में पहली बार भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे थे। शुभमन गिल के पास भी वाडेकर, कपिल और द्रविड़ के क्लब में शामिल होने का मौका है। हां, यह बात अलग है कि ये तीनों पहले भी भारतीय टीम की कप्तानी कर चुके थे, लेकिन गिल पहली बार कप्तान बने हैं।
गिल के लिए यह दौरा इसलिए भी चुनौतीपूर्ण रहेगा, क्योंकि उन्हें रोहित-विराट के अनुभव का साथ नहीं मिलेगा और बुमराह के भी 5 टेस्ट खेलने की संभावना कम है, लेकिन इन स्थितियों के बावजूद भारतीय टीम ने इंग्लैंड में अच्छा प्रदर्शन किया तो यह टीम इंडिया को फिर विशेष स्थापित करने वाला प्रदर्शन होगा
