केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अपराध के सीमा हीन होने और अपराधियों के अक्सर राज्यों व देशों की सीमाओं को लांघने के कारण फोरेंसिक विज्ञान का महत्य कई गुना बढ़ गया है। इसलिए मोदी सरकार ने फोरेंसिक विज्ञान को आपराधिक न्याय प्रणाली का हिस्स्त बना दिया है। उन्होंने कहा कि लोगों को समय पर और उनकी संतुष्टि के अनुस्वर न्याय मिले, सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए भी काम कर रही है।
शाह ने अखिल भारतीय फोरेंसिक विज्ञान शिखर सम्मेलन-2025 को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार आपराधिक न्याय प्रणाली को जनकेंद्रित और वैज्ञानिक बनाने का प्रयास कर रही है। साथ ही सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है कि न्याय मांगने वाले व्यक्ति को सभव पर न्याय मिले और उसे न्याय मिलने की संतुष्टि भी मिले। देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करने के लिए फोरेंसिक विज्ञान बहुत उपयोगी है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब अपराध जिलों, राज्यों और देशों की सीमाओं तक सीमित हुआ करता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। ऐसे में फोरेंसिक विज्ञान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि न तो आरोपी के साथ और न ही शिकायतकर्ता के साथ अन्याय होना चाहिए। अगर हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं तो हमें फोरेंसिक विज्ञान को आपराधिक न्याय प्रणाली का हिस्सा बनाना होगा।दोषसिद्धि की दर बढ़ाना फोरेंसिक विज्ञान के बिना संभव नहीं
गृह मंत्री ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन विशेषज्ञों को एक मंच पर लाने, नीतियों पर चर्चा करने, भविष्य की रणनीति बनाने और उसे आकार देने व सर्वसम्मति से स्वीकार्य समाधान खोजने में बहुत उपयोगी साबित होगा। उन्होंने कहा कि आज के समय में अ हमें समय पर न्याय प्रदान करना है और दोषसिद्धि की दर बढ़ानी है तो यह फोरेंसिक विज्ञान के बिना संभव नहीं है।
सात साल तक की सजा वाले मामलों में फोरेंसिक टीम का दौरा जरूरी , गृह मंत्री ने कहा कि 2009 और 2020 में फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना की दो पहल मोदी के नेतृत्व में की गई, पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में और फिर देश के प्रधानमंत्री के रूप में। इसने न केवल देश को प्रशिक्षित जनशक्ति प्रदान की है, बल्कि कई क्षेत्रों में अनुसंधान के लिए हमारे दरवाजे भी खोले हैं। नए आपराधिक कानूनों के अनुसार, सात साल तक की सजा वाले मामलों में फोरेंसिक दल का दौरा अनिवार्य है।
पुराने कानूनों से आपराधिक न्याय प्रणाली को हो रहा था नुकसान गृह मंत्री ने कहा कि देश को औपनिवेशिक कानूनों से मुक्ति दिलाने के पीएम मोदी के निर्देशानुसार वर्ष 2019 में 2024 तक नए आपराधिक कानूनों को अंतिम रूप देने के लिए काष किया। इस दौरान हुई विस्तृत चर्चा से पता चला कि पुराने कानूनों से हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली की कितना नुकसान हो रहा था। किसी भी कानून में अगर समय के अनुसार उभित परिवर्तन नहीं किए जाते ती वह कानून अप्रासंगिक हो जाता है। पुराने आपराधिक कानूनों का उद्देश्य नागरिकों को न्याय देना नहीं, बल्कि अंग्रेजों की सरकार को बरकरार रखना था।
100 फीसदी पुलिस थाने कंप्यूटर हुए कहा कि देश में अपने एवं सिस्टम के 100 फीसदी पुलिस थाने कंप्यूटराइज हो चुके हैं। करो 14 करोड़ 19 और उनसे ताले करा दिए पर है। 22 हजार कोईकोर्ट का करोड़ 19 लाख का कटाई-प्रिजन के माध्यम से उपलब्ध है।
