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ठगी करने का ऐसा तरीका की आम आदमी कल्पना भी नहीं कर सकता। प्रयागराज से तीन युवक गिरफ्तार

ब्यूरो/लखनऊ  :.उत्तर प्रदेश में टेलीकॉम गेटवे को बाईपास कर इंटरनेशनल कॉल को नॉर्मल कॉल बदल अवैध टेलिफोन एक्सचेंज चलाने वाला एक और गैंग पकड़ा गया है. कानपुर के बाद यूपी एटीएस ने प्रयागराज से सिम बॉक्स के जरिए अवैध टेलीफोन एक्सचेंज चलाने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जिनके पास से 10 सिम बॉक्स 800 से अधिक प्री एक्टिवेटेड सिम व कई अन्य उपकरण बरामद हुए हैं. कानपुर की तरह प्रयागराज में चल रहे अवैध टेलीफोन एक्सचेंज का भी कनेक्शन मुंबई से है. मुंबई में बैठा एक अन्य सरगना इस टेलिफोन एक्सचेंज को चला रहा था.बीते शनिवार को कानपुर से यूपी एटीएस ने सिम बॉक्स के जरिए अवैध टेलिफोन एक्सचेंज चलाने वाले मिर्जा असद और शाहिद जमाल को गिरफ्तार किया था. इन दोनों के पास से कुल 17 सिम बॉक्स और 4000 से अधिक एक्टिवेटेड सिम बरामद हुए थे. कानपुर से पकड़े गए इस अवैध टेलिफोन एक्सचेंज को मास्टरमाइंड नाजिम खान मुंबई में बैठकर चला रहा था. जिसने कोरियर के जरिए सिम बॉक्स कानपुर भेजे थे. यूपीएटीएस ने तीसरे दिन सिम बॉक्स के जरिए टेलीफोन एक्सचेंज चलाने वाले एक दूसरे गैंग को प्रयागराज से गिरफ्तार किया है. यूपीएटीएस ने प्रयागराज के धूमनगंज से सरफराज अहमद, वाजिद सिद्दीकी और मोहम्मद अमन सिद्दीकी को गिरफ्तार किया है. इनके पास से 10 simbox, 814 एक्टिवेटेड सिम, 9 adaptor, 3 fibre stream box, 3 fibre connection box बरामद हुए हैं.सबसे खास बात इस गैंग का सरगना भी मुंबई में बैठकर टेलीफोन एक्सचेंज चल रहा था. मुंबई के भिवंडी का कराने वाला मास्टरमाइंड आसिफ इस इस टेलीफोन एक्सचेंज को चला रहा था. बरामद सिम बॉक्स लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के है जो हर 6 घंटे में ऑटोमेटिक सिम का नंबर बदल लेते थे. टेलीकॉम गेटवे को बाईपास कर विदेश की जाने वाली VOIP (voice over internet protocol) कॉल्स को नॉर्मल में बदलकर यह लोग खाड़ी देशों में बात करवाते थे. कानपुर और प्रयागराज से पकड़े गए अवैध टेलीफोन एक्सचेंज से बड़े पैमाने पर हवाला ट्रेडिंग के भी इस्तेमाल की आशंका जताई गई है.अब यूपी एटीएस को मुंबई में बैठकर अवैध टेलीफोन एक्सचेंज चलाने वाले दो लोगों मोहम्मद आसिफ और नाजिम खान की तलाश है जो मुंबई में बैठकर एनीडेस्क जैसे अन्य ऐप के जरिए इस अवैध टेलीफोन एक्सचेंज को कंट्रोल कर रहे थे.सिम बॉक्स एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होती है जो अवैध टेलीफोन एक्सचेंज संचालक रखते हैं. सिम बॉक्स कई तरह के होते हैं, जिसमें एक साथ कई सिम लगा कर कॉल होती है. किसी सिम बॉक्स में 64, किसी में 128 और किसी में 256 सिम तक एक साथ लगा कर अवैध टेलीफोन एक्सचेंज चलाया जाता है. अवैध टेलीफोन एक्सचेंज का इस्तेमाल विदेश में बात करने के लिए सर्वाधिक किया जाता है. क्योंकि आईएसडी कॉल महंगी होती हैं और जब अवैध टेलीफोन एक्सचेंज के जरिए कॉल होती है तो यह इस पर लोकल कॉल का चार्ज लिया जाता है.जब भी कोई व्यक्ति विदेश में बात करना चाहता है तो कॉलर के नंबर को नियमतः भारत सरकार के टेलीकॉम गेटवे से होकर बात करवाई जाती है.यानी टेलीकॉम गेटवे से विदेश में होने वाली हर आईएसडी कॉल पर भारत सरकार की नजर होती है. उसे पता होता है कि किस नंबर से कहां कॉल की जा रही है.लेकिन जब यही बात सिम बॉक्स के जरिए अवैध टेलीफोन एक्सचेंज से होती है. तो यह टेलीकॉम गेटवे को बाईपास कर होती है.कॉलर जिस नंबर पर कॉल करना चाहता है सिम बॉक्स के जरिए इंटरनेशनल कॉल को लोकल कॉल के नंबर पर कन्वर्ट कर कॉल करवाता है. जिससे आईएसडी कॉल के बजाय लोकल कॉल का चार्ज लगता है. वहीं दूसरी तरफ सिम बॉक्स के जरिए होने वाली इस कॉल पर टेलीकॉम गेटवे को पता ही नहीं चलता कि आखिर यह कॉल किसने किस नंबर पर करवाई क्योंकि कॉलर का भी नंबर बदल जाता है और जिस नंबर पर कॉल होती है. उसका भी नंबर बदल जाता है. यूपी एटीएस चीफ नवीन अरोड़ा का कहना है. इस सिम बॉक्स के जरिए हो रही बात पूरी करें गैरकानूनी होती है. इसमें हवाला ट्रेडिंग या टेरर फंडिंग यह कोई भी बात को इस पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होता, लिहाजा यह देश की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है.

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