लखनऊ। सोने की तस्करी का नेटवर्क अब बिहार की ट्रेनों से बाहर निकलकर नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों तक फैल चुका है। राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की कार्रवाई के बाद तस्करों ने नया रास्ता अपनाया है और अब नेपाल से सटे क्षेत्रों की अवैध बसों और ट्रेवलरों के जरिये सोने की तस्करी कर रहे हैं।
इन क्षेत्रों के कस्बों से पंजाब, गुजरात, राजस्थान और अन्य राज्यों की ओर तस्करी का यह धंधा बढ़ता जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह नया खतरा बन गया है, क्योंकि तस्करी का यह तरीका अब और भी मुश्किलें खड़ी करेगा।चीन से सोना नेपाल और नेपाल से भारत होते हुए पंजाब में पाकिस्तान सीमा तक पहुंच रहा है। तस्करों को महराजगंज, बहराइच, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर व बलरामपुर से पर्यटक परमिट के नाम पर चलने वाली अवैध निजी बसों और ट्रेवलरों से मदद मिल रही है। सुरक्षा एजेंसियों की इस रिपोर्ट के आधार पर हम बृहस्पतिवार को पहले नेपाल से सटे बहराइच जिले के रुपईडीहा कस्बे में पहुंचे।
शाम सात बजे हल्की चहल-पहल थी। यहां सुरक्षा के नाम पर इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट के पासबस दो सिपाही नजर आए। यहां पुलिस स्टेशन के आसपास ही, एक-दो नहीं… आठ अवैध स्टैंड मिले। पंजाब, चंडीगढ़, गुजरात, राजस्थान, हैदराबाद व गोवा के लिए बसें और ट्रेवलर निकलनी शुरू हो गईं। हम भी चंडीगढ़ नंबर की एक ट्रेवलर में सवार हुए जो दिल्ली जा रही थी।
26 सीटर ट्रेवलर में 35 लोग सवार थे। ट्रेवलर में कौन सवार हो रहा है। वाहन में क्या सामान रखा है, यह जांचने वाला कोई नहीं दिखा। सीमा से सटे सिंह साहब के इस अवैध स्टैंड में नेपाल से कुछ लोग तो मुख्य गेट सेइतर अवैध रास्तों से भी आते दिखे। सवारियों को लेकर ट्रेवलर तेजी से आगे बढ़ा। इस बीच नानपारा, मिहिंपुरवा व परसा में सिपाहियों ने तेज टार्च की रोशनी चालक की तरफ दिखाई। चालक ने झट से हाथ में पैसा पकड़ाया और गाड़ी लेकर आगे निकल गया।
नेपाल सीमा पर तैनात रहे पूर्व आईबी अधिकारी संतोष सिंह बताते हैं कि बॉर्डर से सटे कस्बों से अवैध बसों व ट्रेवलरों का । संचालन सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। तस्करी में इनकी संलिप्तता पहले भी उजागर हो चुकी है। अभी ये तस्करी का सोना नेपाल के रास्ते कोलकाता, जयपुर, दिल्ली, आगरा, कानपुर, लखनऊ और गोरखपुर भी पहुंचा रहे हैं।
