नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने रेणुका स्वामी हत्याकांड में कन्नड़ अभिनेता दर्शन थुगुदीपा व छह अन्य को जमानत वाले कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को विवेकाधीन शक्ति का विकृत इस्तेमाल बताया। शीर्ष अदालत ने इस टिप्पणी के साथ अभिनेता और सह-आरोपी को जमानत देने के हाईकोर्ट के पिछले साल 13 दिसंबर के आदेश के खिलाफ कर्नाटक सरकार की अपील पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
जस्टिस जे बी पारदीवाला और आर महादेवन की पीठ ने राज्य सरकार की ओर से वकील सिद्धार्थ लूथरा और आरोपियों के वकील सिद्धार्थ दवे और अन्य की दलीलें सुनीं। आरोपियों को राहत दिए जाने पर सवाल उठाते हुए, जस्टिस पारदीवाला ने बचाव पक्ष के वकील से पूछा, क्या आपको नहीं लगता कि हाईकोर्ट ने जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए आदेश गलत दिया है? चिंता की बात यह है कि ट्रायल कोर्ट से ऐसी गलती स्वीकार्य, हाईकोर्ट जज से नहीं। पीठ ने कहा, वे हाईकोर्ट वाली गलती नहीं करेंगे। उन्होंने मुख्य आरोपी पवित्रा गौड़ा के वकील से कहा- हम दोषसिद्धि या बरी करने का कोई फैसला नहीं देंगे। पीठ ने जमानत आदेश की भाषा पर भी नाराजगी जताई। कहा- यह बहुत दुखद है। क्या हाईकोर्ट दूसरे मामलों में भी ऐसे आदेश देता है। खासकर यह कहना कि हत्या के मामले में गिरफ्तारी के आधार नहीं दिए गए। जिस तरह से यह जमानत आदेश सुनाया गया है, क्या हाईकोर्ट हर जमानत मामले में एक ही तरह का आदेश सुनाता है? पीठ ने कहा, सभी आरोपी जमानत पर बाहर हैं और मुकदमा अभी शुरू होना बाकी है।
