महीने में दो शनिवार को उच्च न्यायालय खोलने के प्रस्ताव का इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है। बार एसोसिएशन ने इस प्रस्ताव को अव्यावहारिक बताते हुए इसे न्याय की गुणवत्ता के लिए नुकसानदेह करार दिया है।
इस संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से अवध बार एसोसिएशन, इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ बेंच सहित देशभर की हाईकोर्ट बार एसोसिएशनों, क्रिमिनल लॉ प्रैक्टिशनर एसोसिएशन एवं अन्य अधिवक्ता संगठनों को पत्र भेजकर एकजुट होकर विरोध करने का आह्वान किया गया है।
पत्र में कहा गया है कि यह प्रस्ताव प्रथम दृष्टया आकर्षक प्रतीत होता है, लेकिन व्यावहारिक रूप से इससे अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और न्यायालय कर्मचारियों पर शारीरिक व मानसिक दबाव बढ़ेगा, जिससे न्याय की गुणवत्ता प्रभावित होगी।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पाण्डे बबुआ, महासचिव अखिलेश कुमार शर्मा और संयुक्त सचिव (प्रेस) रामेश्वर दत्त पांडेय ने संयुक्त रूप से कहा कि हाईकोर्ट पहले ही सप्ताह में पांच दिन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक कार्य करता है, जबकि अधिवक्ताओं का कार्य समय इससे कहीं अधिक होता है। सुबह का समय मामलों की तैयारी में और शाम का समय नए व आगामी मामलों की फाइलिंग में व्यतीत होता है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि जटिल मामलों का गहन अध्ययन अधिवक्ता प्रायः शनिवार और रविवार को ही करते हैं। इन्हीं दिनों विधिक पत्रिकाओं और नए निर्णयों का अध्ययन कर पेशेवर ज्ञान को अद्यतन किया जाता है। ऐसे में महीने में दो शनिवार को अदालतें खुलने से कानूनी सहायता की गुणवत्ता और मुवक्किलों के प्रति अधिवक्ताओं की जिम्मेदारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
बार एसोसिएशन ने इस प्रस्ताव को कॉरपोरेट सोच से प्रेरित बताते हुए कहा कि अधिक कार्य घंटे का अर्थ बेहतर न्याय नहीं होता। प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण न्याय के लिए तनावमुक्त वातावरण अनिवार्य है।
यह जानकारी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव (प्रेस) रामेश्वर दत्त पांडेय द्वारा दी गई।
