लखनऊ। 16वें वित्त आयोग की टीम के साथ बुधवार हुई बैठक में राज्य सरकार ने केंद्रीय करों में हिस्सेदारी 41% से बढ़ाकर 50% करने की मांग की है। साथ ही विशेष विकास योजनाओं के लिए फंड बढ़ाने व अन्य मांगों के लिए सरकार ने आयोग को मांगपत्र भी सौंपा है।
आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि 28 में से 22 राज्यों ने केंद्रीय करों में हिस्सेदारी 50% करने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन 9% वृद्धि की मांग बहुत ज्यादा है। इस पर अंतिम निर्णय बाद में लिया जाएगा। बैठक में सरकार ने प्रदेश के विकास और सुधार के लिए उठाए जा रहे कदमों का ब्योरा दिया जिसकी आयोग ने सराहना की।
लोकभवन में आयोग की 13 सदस्यीय टीम के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ ने बैठक कर राज्य की जरूरतों और मांगों का ब्योरा पेश किया। वर्तमान में राज्यों को केंद्रीय करों में 41% हिस्सेदारी मिलती है अब राज्यों ने केंद्रीय करों में बराबरी का दावा कर दिया है। पनगढ़िया ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि आयोग इस प्रस्ताव को अपनी अंतिम सिफारिशों में शामिल करेगा या नहीं। हालांकि, उन्होंने कहा कि पिछले वित्त आयोगों की सिफारिशोंको आम तौर पर केंद्र सरकार ने बिना किसी बदलाव के स्वीकार किया है।
आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि बड़ा राज्य होने से यूपी की जरूरतें ज्यादा हैं। प्रदेश में काफी अच्छी प्रगति हुई है। राजस्व संबंधी परेशानियों को राज्य सरकार ने बेहतर तरीके से हल किया है। खुद के कर स्रोतों को बढ़ाया है। राजकोषीय घाटा भी करीब तीन प्रतिशत के आसपास है। दोपहर मेंवित्त आयोग की टीम ने विभिन्न राजनीतिक दलों, शहरी व ग्रामीण निकायों के प्रतिनिधियों और ट्रेड से जुड़े प्रतिनिधियों से मुलाकात की। कर बंटवारे के फॉर्मूले में बदलाव का प्रस्ताव : पनगढ़िया ने बताया कि प्रदेश ने करों में बंटवारे के फॉर्मूले में भी बदलाव की मांग की है। प्रति व्यक्ति सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) द्वारा मापी गई आय अंतर (इनकम डिस्टेंस) मानदंड का भार पहलेकी तरह 45 प्रतिशत रखने की मांग की है। भौगोलिक क्षेत्रफल को 15 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने की मांग की है। आबादी में हिस्सेदारी 15 से बढ़ाकर 22.5 फीसदी, डेमोग्राफिक परफॉर्मेंस (जनसांख्यिकीय प्रदर्शन) 12.5 से घटाकर 7.5 फीसदी, वन क्षेत्र मद में 10 से घटाकर 5%, और टैक्स प्रयासों की मद में मिलने वाले अंश को 2.5 से बढ़ाकर 10% करने का प्रस्ताव आयोग को दिया है।
