सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भाई-भतीजावाद और स्वार्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए कलंक है, जो योग्यता से समझौता करते हैं। यह टिप्पणी करते हुए शीर्ष अदालत ने हरियाणा के सरकारी आवास समिति की ओर से न्यासी निकाय (गवर्निंग बॉडी) के एक सदस्य और उसके अधीनस्थ को आवंटित दो फ्लैटों के आवंटन को रद्द कर दिया।
कोर्ट ने आवंटन को सांविधानिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आवंटन प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया गया था। पीठ ने कहा कि हुडा के शासी निकाय के एक सदस्य और उसके अधीनस्थ को किए गए आवंटन मनमाने, पक्षपातपूर्ण हैं और समाज के स्वयं के पात्रता मानदंडों का उल्लंघन करते हैं।
शीर्ष अदालत शहरी संपदा एवं नगर एवं ग्रामीण नियोजन कर्मचारी कल्याण संगठन (एचईडब्ल्यूओ) के सदस्य दिनेश कुमार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा थी, जिसमें उन्होंने दो उच्च श्रेणी के सुपर डीलक्स फ्लैटों के आवंटन को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा कि जिन दो लोगों को फ्लैट आवंटित किए गए वह अपात्र है और उन्होंने एचईडब्ल्यूओ पर पक्षपात का आरोप लगाया।
फ्लैट आवंटन में पक्षपात, हुडा पर एक लाख का जुर्माना : अपात्र को फ्लैट आवंटित किया गया सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता ने विज्ञापन के तहत आवेदन किया था और वह सभी मानदंडों पर पात्र था, उसने प्रतिनियुक्ति अवधि और मूल वेतन दोनों आवश्यकताओं को पूरा किया था। शासी निकाय के उस सदस्य को कोई तरजीही आवंटन नहीं दिया जा सकता था जो हुडा की सेवा में छह महीने की प्रतिनियुक्ति अवधि भी पूरी नहीं कर रहा था। हमें तीसरे प्रतिवादी को किए गए आवंटन को बरकरार रखने का कोई कारण नहीं दिखता, जो स्पष्ट रूप से पक्षपात और स्वार्थ का खुला प्रदर्शन है।
आवंटियों पर भी लगाया जुर्माना : शक्तियों और अधिकार के घोर दुरुपयोग को देखते हुए, शीर्ष न्यायालय ने हुडा पर 1 लाख रुपये का जुर्माना, तीसरे प्रतिवादी (बीबी गुप्ता) पर 50,000 रुपये का अतिरिक्त जुर्माना और चौथे प्रतिवादी (पूरन चंद) पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया। पीठ ने लाभार्थियों को फ्लैट खाली करने का आदेश भी दिया। कोर्ट ने कहा कि हुडा अपीलकर्ता को मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 50,000 रुपये का भुगतान करेगा और शेष राशि सर्वोच्च न्यायालय की विधि सेवा समिति के पास जमा की जाएगा ।
