गुवाहाटी/शिलांग/इंदौर। इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या को सुलझाने में मेघालय पुलिस की एसआईटी के लिए नवदंपती का मेघालय यात्रा की कोई भी तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट न करना पहला सुराग साबित हुआ। दंपती के इस व्यवहार को अजीब मानते हुए एसआईटी ने 42 वीडियो फुटेज की जांच की और उनके व्यवहार पैटर्न और आवाजाही का अध्ययन किया। ये फुटेज मामले में आखिरकार महत्वपूर्ण साबित हुए।
राजा का शव मिलने के बाद जासूसों ने इन्हें अपराध स्थल से जोड़ा और हत्या के बाद उनकी गतिविधियों व गवाहों के बयानों की भी जांच की। मेघालय पुलिस ने मंगलवार को खुलासा किया था कि राजा की हत्या की गुत्थी सुलझाने और संदिग्धों की पकड़ने के अभियान को अनौपचारिक रूप से ऑपरेशन हनीमून नाम दिया गया था। यह विशिष्ट कोड नाम इसलिए दिया गया क्योंकि 11 मई को विवाह बंधन में बंधे नवविवाहित जोड़े राज्य में हनीमून मनाने आए थे। पुलिस ने 7 जून को आधिकारिक तौर पर ऑपरेशन हनीमून शुरू किया था। इसके तहत 8 जून तक मध्य प्रदेश में कई गिरफ्तारियां की गईं। पुलिस ने बताया कि हमारा शक तब और बढ़ गया जब राजा की मौत के बाद रात 2:15 बजे उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर कुछ पोस्ट दिखाई दिए। इनके बारे में बाद में जांचकर्ताओं को पता चला कि यह जानबूझकर गुमराह करने के लिए पोस्ट किया गया था। सूत्रों ने बताया कि निगरानी फुटेज से पता चला है कि सोनम ने अपराध स्थल से करीब 10 किमी दूर सुपारी किलर से मुलाकात की थी।
